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तीन अनमोल सूत्र (मेंहनत, धर्म, मौन )
तीन अनमोल सूत्र
Three precious sutras (hard work, religion, silence)
मेंहनत करने से दरिद्रता, धर्म करने से पाप और मौन धारण करने से कभी भी कलह नहीं रहता है।"
मेहनत - केवल मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं अपितु उचित दिशा में अथवा तो एक ही दिशा में मेहनत करना भी अनिवार्य हो जाता है। उचित समय एवं उचित दिशा में की गई मेहनत सदैव जीवन उन्नति का मूल होती है।
धर्म - सत्य, प्रेम और करुणा ये धर्म का मूल है। धर्म को समग्रता की दृष्टि से देखा जाए तो परोपकार, परमार्थ, प्राणीमात्र की सेवा, सद्कर्म, श्रेष्ठ कर्म, सद ग्रंथ अथवा तो सत्संग का आश्रय, ये सभी धर्म के ही रूप हैं। जब व्यक्ति द्वारा इन दैवीय गुणों को जीवन में उतारा जाता है तो उसकी पाप की वृत्तियां स्वतः नष्ट होने लगती हैं।
मौन - मौन का टूटना ही परिवार में अथवा तो समाज में कलह को जन्म देता है। विवाद रूपी विष की बेल काटने के लिए मौन एक प्रबल हथियार है।आवेश के क्षणों में यदि मौन रुपी औषधि का पान किया जाए तो विवाद रुपी रोग का जन्म संभव ही नहीं।
आवेश के क्षणों में मौन धारण करते हुए धर्म मार्ग का आश्रय लेकर पूरे मनोयोग से मेहनत करो, यही सफलतम जीवन का सूत्र है।
Daily Quotes
बुराई वही करते हैं जो बराबरी नहीं कर सकते..
एक मर्द की कामयाबी के पीछे
उसके बूढ़े बाप की जवानी होती है...!!
वक़्त, दोस्त, और रिश्ते,
वो चीज़ें हैं
जो मिलती तो मुफ़्त में हैं
मगर इनकी कीमत का
पता तब चलता है
जब ये कहीं खो जाते हैं...
अगर कर्म पर विश्वास
और भगवान पर श्रद्धा रखोगे,
तो समय कितना भी बुरा क्यों न हो,
रास्ता अवश्य मिल जाएगा..!
सुंदर औरत और
कमाऊ पुरुष के
अलावा यहाँ जो भी हैं
समाज उसे रद्दी
समझता हैं।
कल मैं होशियार था,
इसलिए मैं
दुनिया को बदलना
चाहता था।
आज मैं बुद्धिमान हूँ,
इसलिए
मैं अपने आप को
बदल रहा हूँ।
🙇♂ जय श्री कृष्णा 🙇♂
Daily Quotes
अग्नि वेदाश्चत्वारो मीमांसा न्याय विस्तरः।
पुराणं धर्मशास्त्रं च विद्या ह्याताश्चर्तुदश ।।
विभूति योग आयुर्वेदा धनुर्वेदो गान्धर्वश्चैव ते त्रयः।
अर्थशास्त्रं चतुर्थं तु विद्या ह्यष्टादशैव ताः ।। (विष्णु पुराण-3.6.27.28)
Daily Quotes
।। श्रीहरि: ।।
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं।
योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम।।३।।
(गजेन्द्रमोक्ष स्तोत्र से)
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