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तीन अनमोल सूत्र (मेंहनत, धर्म, मौन )

 तीन अनमोल सूत्र 

Three precious sutras (hard work, religion, silence)

मेंहनत करने से दरिद्रता, धर्म करने से पाप और मौन धारण करने से कभी भी कलह नहीं रहता है।"

मेहनत - केवल मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं अपितु उचित दिशा में अथवा तो एक ही दिशा में मेहनत करना भी अनिवार्य हो जाता है। उचित समय एवं उचित दिशा में की गई मेहनत सदैव जीवन उन्नति का मूल होती है। 

 

धर्म - सत्य, प्रेम और करुणा ये धर्म का मूल है। धर्म को समग्रता की दृष्टि से देखा जाए तो परोपकार, परमार्थ, प्राणीमात्र की सेवा, सद्कर्म, श्रेष्ठ कर्म, सद ग्रंथ अथवा तो सत्संग का आश्रय, ये सभी धर्म के ही रूप हैं। जब व्यक्ति द्वारा इन दैवीय गुणों को जीवन में उतारा जाता है तो उसकी पाप की वृत्तियां स्वतः नष्ट होने लगती हैं।

 

मौन - मौन का टूटना ही परिवार में अथवा तो समाज में कलह को जन्म देता है। विवाद रूपी विष की बेल काटने के लिए मौन एक प्रबल हथियार है।आवेश के क्षणों में यदि मौन रुपी औषधि का पान किया जाए तो विवाद रुपी रोग का जन्म संभव ही नहीं। 

 

आवेश के क्षणों में मौन धारण करते हुए धर्म मार्ग का आश्रय लेकर पूरे मनोयोग से मेहनत करो, यही सफलतम जीवन का सूत्र है।



How to follow religion in Kaliyuga?

कलियुग में धर्म का पालन कैसे करें?




हिंदू धर्म के अनुसार, वर्तमान समय को "कलियुग" कहा जाता है, जो चार युगों में अंतिम और सबसे जटिल युग है। इस युग में अधर्म और असत्य का प्रभाव अधिक होता है, लेकिन फिर भी व्यक्ति अपने सद्कर्मों और सच्चे आचरण के माध्यम से धर्म का पालन कर सकता है।

Spiritual significance of Navratri

नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व: माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का महत्व और ऊर्जा






Spiritual significance of Navratri: Importance and energy of worshipping nine forms of Maa Durga


नवरात्रि हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है, जो वर्ष में दो बार मनाया जाता है – चैत्र और शारदीय नवरात्रि के रूप में। यह नौ दिनों का उत्सव माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना का प्रतीक है और साधना, शक्ति, और आत्मशुद्धि का समय माना जाता है।


Nav Samvatsar: A celebration of new energy

नव संवत्सर: एक नई ऊर्जा का उत्सव



"नववर्ष शुभमस्तु ते, सर्वेषां मंगलम भवेत्।"


नव संवत्सर हिंदू पंचांग के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत का पावन पर्व है। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है और इसी दिन से विक्रम संवत का आरंभ भी माना जाता है। यह दिन प्रकृति, धर्म और आध्यात्मिकता से जुड़ा हुआ है, जो हमें एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संदेश देता है।


Gudi Padwa: Beginning of the New Year

गुड़ी पड़वा: नववर्ष का शुभारंभ


"नवसंवत्सराय शुभमस्तु, जयतु हिंदू संस्कृतिः।"


गुड़ी पड़वा, महाराष्ट्र और गोवा में मनाया जाने वाला एक प्रमुख पर्व है, जो हिंदू नववर्ष के आगमन का प्रतीक है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है और इसे विक्रम संवत के प्रारंभ का शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में युगादि, सिंधी समाज में चेटीचंड, और उत्तर भारत में विक्रम संवत प्रारंभ।


Hindu New Year: A New Beginning

हिंदू नववर्ष : एक नई शुरुआत 



"यथा शिखा मयूराणां, नागानां मणयो यथा। तद्वद् वेदाङ्गशास्त्राणां, गणितं मूर्ध्नि स्थितम्।।"


हिंदू नववर्ष भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों और तिथियों में मनाया जाता है, लेकिन सभी का उद्देश्य एक ही है—नए वर्ष का स्वागत, नई ऊर्जा का संचार और भगवान से आशीर्वाद की प्रार्थना।


Vishnu Lakshmi Khajuraho temples

 


Vishnu Lakshmi Khajuraho temples

Ganeshji

 



बाधाओं को दूर करने वाले गणेशजी को अक्सर पत्नियों के साथ दर्शाया जाता है
ऋद्धि समृद्धि, सौभाग्य का प्रतीक है, और यह भौतिक और आध्यात्मिक विकास से जुड़ी है।
सिद्धि आध्यात्मिक शक्ति, ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार का प्रतिनिधित्व करती है, जो ब्रह्मांड के परिवर्तनकारी और मुक्तिदायी पहलुओं का प्रतीक है।
साथ में, ऋद्धि और सिद्धि गणेशजी की पत्नी के दोहरे पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि दोनों को दर्शाती हैं।


Glorious Vijaya Stamba of Chittor

 



Glorious Vijaya Stamba of Chittor


Designing her feet

 

designing her feet (अल्ता लगाना)



पहली नज़र में ऐसा लगता है कि वह कोई काँटा निकाल रही है, लेकिन करीब से देखने पर पता चलता है कि वह अपने पैरों को जटिल तरीके से डिज़ाइन कर रही है, और उसका सहायक एक उत्तल दर्पण पकड़े हुए है। 


Krishna Berenice Egypt 2nd to 4th century ce

 



Balarama, Ekanamsa, Vasudeva - Krishna
Berenice Egypt
2nd to 4th century ce

Hanuman ji was an enlightened scholar of the Vedas.



 न अन् ऋग्वेद विनीतस्य न अ यजुर्वेद धारिणः ।
न अ-साम वेद विदुषः शक्यम् एवम् विभाषितुम् ।। 
वाल्मीकि रामायण 4/3/28

राम कहते हैं कि जिस व्यक्ति से मैंने अभी-अभी बात की थी, वह ऋग्वेद में अच्छी तरह से प्रशिक्षित था, उसके पास यजुर्वेद, सामवेद के विद्वतापूर्ण ज्ञान को याद करने की अपार शक्ति है। वैदिक व्याकरण और संबंधित ग्रंथों के विद्वतापूर्ण आदेश के बिना इस प्रकार की प्रभावशाली और हृदयस्पर्शी बात असंभव है। इस प्रकार, श्री राम ने स्वीकार किया कि हनुमान जी वेदों के प्रबुद्ध विद्वान थे।

 

Rama says that the person with whom I just talked was well trained in the Rigveda, has enormous power to remember Yajurveda, scholarly knowledge of Samaveda. This type of impressive and heart-touching talk is impossible without a scholarly command of Vedic grammar and related texts. Thus, Shri Rama acknowledged that Hanuman Ji was an enlightened scholar of the Vedas.


Who Harmed Religion and Devotion

 



श्रीमद्भागवत में स्पष्ट रूप से आया है की जब कलियुग ने गौ और गौवंश पर अत्याचार करना शुरू किया और राजा परीक्षित ने उनसे प्रश्न किया कि किसने धर्म और भक्ति को हानि पहुँचायी है तो धर्म बोल पड़ा  ........


राजन, हमारे उपर होने वाले अत्याचार से हम तो नष्ट हो जाएँगे और जो अत्याचार करेंगे उन्हें पाप भी लगेगा पर उससे अधिक पाप उन्हें लगेगा जो चुपचाप धर्म की हानि होता हुआ देखेंगे या उन गौ वध करने वाले आततायियों से कोई संबंध रखेंगे ।


अतः वे सभी लोग जो आज चुप बैठे हैं या विधर्मियों से किसी भी प्रकार का व्यापारिक व्यवहारिक मानसिक संबंध रखे हैं वे सब भी उन सब कुकर्म ( जैसे रामनवमी पर पत्थर बाज़ी ) में सम्मिलित हैं ।और यदि आज भी न जगे तो दुर्दिन के लिए तैयार हो जाएँ ।


कायर बनकर या फिर " मुझे क्या " की मानसिकता वाले  हिंदुनामधारी उन मलेच्छों से भी अधिक पापी हैं।


@wayoflifekarma

Interesting facts related to Ram Setu

 



अमेरिका में जब रेलवे ट्रैक का विस्तार हुआ तब कई रेल कंपनियों में रेलवे ट्रैक बिछाकर खूब सारी ट्रेन चला कर पैसे कमाने की होड़ मच गई।


लेकिन पूर्वी अमेरिका को पश्चिम अमेरिका को जोड़ते समय बीच में एक बेहद विशाल समुद्र जैसी झील थी जो अमेरिका की सबसे बड़ी झील है जिसका नाम द ग्रेट साल्ट लेक है।


बड़े-बड़े इंजीनियरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी इस झील के आर पार रेलवे ट्रैक कैसे बिछाया जाए।


यूनियन पेसिफिक की टीम में एक इंजीनियर था जिसने रामायण पढ़ी थी। उसे रामसेतु के बारे में जानकारी थी।   वह भारत आया और राम सेतु के प्राचीन सनातनी विज्ञान  का अध्ययन किया।  तब उसके दिमाग की घंटी बज गई और उसने यह पता लगा लिया कि यदि हम झील में एकदम सीधी रेलवे लाइन बिछाएंगे तब यह रेलवे ट्रैक लहरों से टूट सकता है। उसने ठीक रामसेतु के डिजाइन पर अपना रेलवे ट्रैक बनाया जो पिछले 60 सालों से अमेरिका में वहीं का वहीं खड़ा है और सेवा दे रहा है।


दरअसल जहां पर पानी लहरदार होता है वहां जिग जैग डिजाइन से ही स्टेबिलिटी मिलती है।


उनकी किताबों में तो धरती चपटी है, सूरज दलदल में गिर जाता है, यही उनका विज्ञान है।



@wayoflifekarma

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