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Bhagavad Gita 1.13

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.13 ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः । सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ॥ १.१३ ॥ Translation तत्पश्चात् शंख, नगाड़े, बिगुल, तुरही तथा सींग सहसा एकसाथ बज उठे | वह समवेत स्वर अत्यन्त कोलाहलपूर्ण था | Bhagavad Gita As It Is 1.13 tataḥ śaṅkhāś ca bheryaś ca paṇavānaka-gomukhāḥ sahasaivābhyahanyanta sa śabdas tumulo ’bhavat Translation After that, the conchshells, drums, bugles, trumpets and horns were all suddenly sounded, and the combined sound was tumultuous. -------------------------------------------

Daily Quotes 31/12/2024

Daily Quotes :- Daily Quotes 

Bhagavad Gita 1.12

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.12 तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः । सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ॥ १.१२ ॥ Translation तब कुरुवंश के वयोवृद्ध परम प्रतापी एवं वृद्ध पितामह ने सिंह-गर्जना की सी ध्वनि करने वाले अपने शंख को उच्च स्वर से बजाया, जिससे दुर्योधन को हर्ष हुआ | Purport कुरुवंश के वयोवृद्ध पितामह अपने पौत्र दुर्योधन का मनोभाव जान गये और उनके प्रति अपनी स्वाभाविक दयावश उन्होंनेउसे प्रसन्न करने के लिए अत्यन्त उच्च स्वर से अपना शंख बजाया जो उनकी सिंह के समान स्थिति के अनुरूप था | अप्रत्यक्ष रूप में शंख के द्वारा प्रतीकात्मक ढंग से उन्होंने अपने हताश पौत्र दुर्योधन को बता दिया कि उन्हें युद्ध में विजय की आशा नहीं है क्योंकि दुसरे पक्ष में साक्षात् भगवान् श्रीकृष्ण हैं | फिर भी युद्ध का मार्गदर्शन करना उनका कर्तव्य था और इस सम्बन्ध में वे कोई कसर नहीं रखेंगे | Bhagavad Gita As It Is 1.12 tasya sañjanayan harṣaṁ kuru-vṛddhaḥ pitāmahaḥ siṁha-nādaṁ vinadyoccaiḥ śaṅkhaṁ dadhmau pratāpavān Translation Then Bhīṣma, the great valiant grandsire of the Kuru dynasty, t...