नवरात्रि का चौथा दिन: मां कुष्मांडा की पूजा
नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के चौथे रूप, मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कुष्मांडा को ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली माना जाता है। आइए जानते हैं मां कुष्मांडा के बारे में विस्तार से:-
मां कुष्मांडा का स्वरूप
कुष्मांडा शब्द का अर्थ है कद्दू के आकार की।
वे कमंडल, धनुष, बाण और खड्ग धारण करती हैं।
इनका वाहन सिंह है।
इनका रंग पीला होता है।
वे शक्तिशाली और साहसी हैं।
मां कुष्मांडा का महत्व
मां कुष्मांडा की पूजा करने से ब्रह्मांड की उत्पत्ति होती है।
वे शक्ति और साहस की देवी हैं।
उनकी पूजा करने से जीवन में सफलता मिलती है।
पूजा विधि
कलश स्थापना: सबसे पहले कलश स्थापित किया जाता है।
अष्टगंध: मां कुष्मांडा की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर अष्टगंध चढ़ाया जाता है।
पुष्प: पीले या लाल फूल चढ़ाए जाते हैं।
दीपक: पांच देसी घी के दीपक जलाए जाते हैं।
धूप: अगरबत्ती या धूप जलाया जाता है।
नैवेद्य: फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है।
मंत्र जाप: मां कुष्मांडा का मंत्र जाप किया जाता है।
मां कुष्मांडा का मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
मां कुष्मांडा की आरती
मां कुष्मांडा की आरती गाकर उनकी स्तुति की जाती है।
नवरात्रि के चौथे दिन क्या करें?
इस दिन व्रत रखा जाता है।
मां कुष्मांडा की कथा सुननी चाहिए।
मां कुष्मांडा की आरती गाएं।
मां कुष्मांडा के मंत्रों का जाप करें।

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