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जनवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Hindu Calendar Months

हिंदू कैलेंडर में 12 महीनों के नाम होते हैं, जो चंद्र महीनों पर आधारित होते हैं। ये नाम निम्नलिखित हैं:- 1. चैत्र (Chaitra): मार्च-अप्रैल 2. वैशाख (Vaishakha): अप्रैल-मई 3. ज्येष्ठ (Jyeshtha): मई-जून 4. आषाढ़ (Ashadha): जून-जुलाई 5. श्रावण (Shravana): जुलाई-अगस्त 6. भाद्रपद (Bhadrapada): अगस्त-सितंबर 7. आश्विन (Ashwin): सितंबर-अक्टूबर 8. कार्तिक (Kartika): अक्टूबर-नवंबर 9. मार्गशीर्ष (Margashirsha): नवंबर-दिसंबर 10. पौष (Pausha): दिसंबर-जनवरी 11. माघ (Magha): जनवरी-फरवरी 12. फाल्गुन (Phalguna): फरवरी-मार्च विशेषताएँ: ये नाम चंद्रमा के चरणों और ऋतुओं के आधार पर तय किए जाते हैं। हर महीने में दो पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा तक का शुक्ल पक्ष और पूर्णिमा से अमावस्या तक का कृष्ण पक्ष) होते हैं। इन महीनों का उपयोग धार्मिक त्योहारों और संस्कारों की तिथियों के निर्धारण में किया जाता है। -------------------------------------------------------------

Swami Vivekananda Jayanti: Celebration of a visionary

स्वामी विवेकानंद जयंती: एक युगदृष्टा का उत्सव WOLK: Swami Vivekananda Jayanti: Celebration of a visionary स्वामी विवेकानंद जयंती, जिसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जन्म तिथि के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह दिन न केवल उनके अद्वितीय जीवन और योगदान का सम्मान करता है, बल्कि युवा पीढ़ी को उनके विचारों और आदर्शों से प्रेरित होने का भी संदेश देता है। स्वामी विवेकानंद भारत के महानतम संतों में से एक थे, जिनकी शिक्षाओं ने न केवल भारत को, बल्कि पूरे विश्व को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मार्गदर्शन प्रदान किया।

Makar Sankranti

    मकर सक्रांति विशेष   मकर संक्रांति की 16 बड़ी बातें पर्व मनाने से पहले जरूर जानें     सूर्य संक्रांति में मकर सक्रांति का महत्व ही अधिक माना गया है। माघ माह में कृष्ण पंचमी को मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। इस बार 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा । आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति के बारे में रोचक 16 तथ्‍य क्या है ।   वर्ष में होती है 12 संक्रांतियां :- पृथ्वी साढ़े 23 डिग्री अक्ष पर झुकी हुई सूर्य की परिक्रमा करती है तब वर्ष में 4 स्थितियां ऐसी होती हैं , जब सूर्य की सीधी किरणें 21 मार्च और 23 सितंबर को विषुवत रेखा , 21 जून को कर्क रेखा और 22 दिसंबर को मकर रेखा पर पड़ती है। वास्तव में चन्द्रमा के पथ को 27 नक्षत्रों में बांटा गया है जबकि सूर्य के पथ को 12 राशियों में बांटा गया है। भारतीय ज्योतिष में इन 4 स्थितियों को 12 संक्रांतियों में बांटा गया है जिसमें से 4 संक्रांतियां महत्वपूर्ण होती हैं- मेष , तुला , कर्क और मकर संक्रांति ।   1. मक...

Purnima Vrat

    पूर्णिमा व्रत पूर्णिमा व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। पूर्णिमा का व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। पूर्णिमा तिथि के दिन जो व्यक्ति स्नान दान के कार्य करता है वह शुभ फलदायी माने जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत करने से व्यक्ति को सभी दुख और कष्टों से मुक्ति मिलती है। कब रखा जाएगा पौष पूर्णिमा का व्रत? पंचांग के अनुसार, पौष माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 13 जनवरी को सुबह में 5 बजकर 2 मिनट पर होगा और पूर्णिमा तिथि अगले दिन 14 जनवरी को सुबह 3 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में पूर्णिमा तिथि उदयकाल में 13 जनवरी को होने के कारण पूर्णिमा का व्रत 13 जनवरी सोमवार के दिन रखा जाएगा। पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व पौष पूर्णिमा के दिन काशी, प्रयागराज और हरिद्वार में शाही स्नान किया जाता है। इसी के साथ इस दिन सूर्यदेव को जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर सूर्य और चंद्रमा दोनों की पूजा की जाती है। ऐसा करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।...

Bhagavad Gita 1.23

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.23 योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः । धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ॥ १.२३ ॥ Translation मुझे उन लोगों को देखने दीजिये जो यहाँ पर धृतराष्ट्र के दुर्बुद्धि पुत्र (दुर्योधन) को प्रसन्न करने की इच्छा से लड़ने के लिए आये हुए हैं | Purport यह सर्वविदित था कि दुर्योधन अपने पिता धृतराष्ट्र की साँठगाँठ से पापपूर्ण योजनाएँ बनाकर पाण्डवों के राज्य को हड़पना चाहता था | अतः जिन समस्त लोगों ने दुर्योधन का पक्ष ग्रहण किया था वे उसी के समानधर्मा रहे होंगे | अर्जुन युद्ध प्रारम्भ होने के पूर्व यह तो जान ही लेना चाहता था कि कौन-कौन से लोग आये हुए हैं | किन्तु उनके समक्ष समझौता का प्रस्ताव रखने की उसकी कोई योजना नहीं थी | यह भी तथ्य था की वह उनकी शक्ति का, जिसका उसे सामना करना था, अनुमान लगाने कि दृष्टि से उन्हें देखना चाह रहा था, यद्यपि उसे अपनी विजय का विश्र्वास था क्योंकि कृष्ण उसकी बगल में विराजमान थे | Bhagavad Gita As It Is 1.23 yotsyamānān avekṣe ’haṁ ya ete ’tra samāgatāḥ dhārtarāṣṭrasya durbuddher yuddhe priya-...

Guru Gobind Singh Jayanti Editorial

गुरु गोबिंद सिंह जयंती 2025: एक प्रेरणादायक पर्व भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में गुरु गोबिंद सिंह जी का स्थान अद्वितीय है। सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने न केवल धार्मिक चेतना को प्रोत्साहित किया बल्कि सामाजिक सुधार, समानता, और मानवता की सेवा के नए आयाम स्थापित किए। उनकी जयंती, जिसे " गुरु गोबिंद सिंह जयंती " कहा जाता है, हर साल चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाई जाती है। 2025 में, यह पावन पर्व 6 जनवरी को मनाया जाएगा। यह दिन न केवल सिख समुदाय बल्कि सभी धर्मों और संस्कृतियों के लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। --- गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन परिचय गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब (वर्तमान में बिहार) में हुआ था। उनका मूल नाम "गोबिंद राय" था। बचपन से ही उन्होंने धार्मिक, सांस्कृतिक और सैन्य शिक्षा प्राप्त की। वे केवल 9 वर्ष की उम्र में गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हुए, जब उनके पिता, गुरु तेग बहादुर जी, ने कश्मीरी पंडितों और अन्य धर्मों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबि...

Bhagavad Gita 1.21-22

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.21-22 अर्जुन उवाच सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥ १.२१ ॥ यावदेतान्निरिक्षेऽहं योद्‌धुकामानवस्थितान् । कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे ॥ १.२२ ॥ Translation अर्जुन ने कहा - हे अच्युत! कृपा करके मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच में ले चलें जिससे मैं यहाँ युद्ध की अभिलाषा रखने वालों को और शस्त्रों कि इस महान परीक्षा में, जिनसे मुझे संघर्ष करना है, उन्हें देख सकूँ | Purport यद्यपि श्रीकृष्ण साक्षात् श्रीभगवान् हैं, किन्तु वे अहेतुकी कृपावश अपने मित्र कि सेवा में लगे हुए थे | वे अपने भक्तों पर स्नेह दिखाने में कभी नहीं चूकते इसीलिए अर्जुन ने उन्हें अच्युत कहा है | सारथी रूप में उन्हें अर्जुन की आज्ञा का पालन करना था और उन्होंने इसमें कोई संकोच नहीं किया, अतः उन्हें अच्युत कह कर सम्बोधित किया गया है | यद्यपि उन्होंने अपने भक्त का सारथी-पद स्वीकार किया था, किन्तु इससे उनकी परम स्थिति अक्षुण्ण बनी रही | प्रत्येक परिस्थिति में वे इन्द्रियों के स्वामी श्रीभगवान् हृषीकेश हैं | भगवान् तथा उनके सेवक का सम्बन्ध अत्यन्त मधुर एवं दिव्य होता है | सेव...

Guru Gobind Singh Jayanti 2025

WOLK : गुरु गोबिंद सिंह जयंती 2025 गुरु गोबिंद सिंह जयंती सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती है। यह दिन सिख समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिख धर्म के सिद्धांतों को सुदृढ़ किया और खालसा पंथ की स्थापना की। 2025 में गुरु गोबिंद सिंह जयंती 6 जनवरी को मनाई जाएगी। गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन परिचय गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब (बिहार) में हुआ था। वह न केवल एक महान आध्यात्मिक गुरु थे, बल्कि एक अद्वितीय योद्धा, कवि और समाज सुधारक भी थे। उनका जीवन धर्म, समानता और मानवता के लिए समर्पित था। प्रमुख योगदान:-  1. खालसा पंथ की स्थापना (1699):-   बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की और सिख धर्म को संगठित और सुदृढ़ किया। 2. पंच प्यारों का चयन:-   पांच समर्पित सिखों को "पंच प्यारे" के रूप में सम्मानित किया, जो निडरता और सेवा का प्रतीक हैं। 3. गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु का दर्जा:-   उन्होंने सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहिब, को अंतिम और शाश्वत गुरु घोषित किया। 4...

Bhagavad Gita 1.20

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.20 अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्कपिध्वजः प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते ॥ १.२० ॥ Translation उस समय हनुमान से अंकित ध्वजा लगे रथ पर आसीन पाण्डुपुत्र अर्जुन अपना धनुष उठा कर तीर चलाने के लिए उद्यत हुआ | हे राजन् ! धृतराष्ट्र के पुत्रों को व्यूह में खड़ा देखकर अर्जुन ने श्रीकृष्ण से ये वचन कहे | Purport युद्ध प्रारम्भ होने ही वाला था | उपर्युक्त कथन से ज्ञात होता है कि पाण्डवों की सेना कि अप्रत्याशित व्यवस्था से धृतराष्ट्र के पुत्र बहुत कुछ निरुत्साहित थे क्योंकि युद्धभूमि में पाण्डवों का निर्देशन भगवान् कृष्ण के आदेशानुसार हो रहा था | अर्जुन की ध्वजा पर हनुमान का चिन्ह भी विजय का सूचक है क्योंकि हनुमान ने राम तथा रावण युद्ध में राम कि सहायता की थी जिससे राम विजयी हुए थे | इस समय अर्जुन कि सहायता के लिए उनके रथ पर राम तथा हनुमान दोनों उपस्थित थे | भगवान् कृष्ण साक्षात् राम हैं और जहाँ भी राम रहते हैं वहाँ नित्य सेवक हनुमान होता है तथा उनकी नित्यसंगिनी, वैभव कि देवी सीता उपस्थित रहत...

Bhagavad Gita 1.19

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.19 स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् । नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलोऽभ्यनुनादयन् ॥ १.१९ ॥ Translation इन विभिन्न शंखों की ध्वनि कोलाहलपूर्ण बन गई जो आकाश तथा पृथ्वी को शब्दायमान करती हुई धृतराष्ट्र के पुत्रों के हृदयों को विदीर्ण करने लगी | Purport जब भीष्म तथा दुर्योधन के पक्ष के अन्य वीरों ने अपने-अपने शंख बजाये तो पाण्डवों के हृदय विदीर्ण नहीं हुए | ऐसी घटनाओं का वर्णन नहीं मिलता किन्तु इस विशिष्ट श्लोक में कहा गया है कि पाण्डव पक्ष में शंखनाद से धृतराष्ट्र के पुत्रों के हृदय विदीर्ण हो गये | इसका कारण स्वयं पाण्डव और भगवान् कृष्ण में उनका विश्र्वास है | परमेश्र्वर कि शरण ग्रहण करने वाले को किसी प्रकार का भय नहीं रह जाता चाहे वह कितनी ही विपत्ति में क्यों न हो | Bhagavad Gita As It Is 1.19 sa ghoṣo dhārtarāṣṭrāṇāṁ hṛdayāni vyadārayat nabhaś ca pṛthivīṁ caiva tumulo ’bhyanunādayan Translation The blowing of these different conchshells became uproarious. Vibrating both in the sky and on the earth, it shattered the hearts ...

Daily Quotes 04/01/2025

Daily Quotes 4/01/2025 Daily Quotes

Vinayaka Chaturthi Editorial

विनायक चतुर्थी: जीवन में बुद्धि, विवेक और सफलता का पर्व भारत एक ऐसा देश है, जहाँ हर त्यौहार अपनी गहराई और आध्यात्मिकता में अनोखा है। इनमें से एक महत्वपूर्ण पर्व है विनायक चतुर्थी, जो हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश को समर्पित है। इस पर्व का न केवल धार्मिक महत्व है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू में सामंजस्य और सकारात्मकता लाने का प्रतीक है। भगवान गणेश का परिचय :- भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के देवता माना जाता है। उनका नाम लेते ही जीवन की हर कठिनाई आसान हो जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, गणेश जी का पूजन किसी भी शुभ कार्य से पहले किया जाता है, ताकि उसमें कोई बाधा न आए। गणेश जी की आकृति भी गहरे प्रतीकों से भरी हुई है। उनका बड़ा मस्तक विशाल सोच का प्रतीक है, छोटे नेत्र गहन ध्यान और सूक्ष्म दृष्टि का, और बड़ा पेट हर परिस्थिति को स्वीकारने की शक्ति का। विनायक चतुर्थी का धार्मिक महत्व :- विनायक चतुर्थी हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, जो भगवान गणेश को समर्पित होती है। यह दिन भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मान...

Bhagavad Gita 1.16-18

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.16-18 अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः । नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥ १.१६ ॥ काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः । धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥ १.१७ ॥ द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते । सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् ॥ १.१८ ॥ Translation हे राजन्! कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अपना अनन्तविजय नामक शंख बजाया तथा नकुल और सहदेव ने सुघोष एवं मणिपुष्पक शंख बजाये | महान धनुर्धर काशीराज, परम योद्धा शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट, अजेय सात्यकि, द्रुपद, द्रौपदी के पुत्र तथा सुभद्रा के महाबाहु पुत्र आदि सबों में अपने-अपने शंख बजाये | Purport संजय ने राजा धृतराष्ट्र को अत्यन्त चतुराई से यह बताया कि पाण्डु के पुत्रों को धोखा देने तथा राज्यसिंहासन पर अपने पुत्रों को आसीन कराने का अविवेकपूर्ण नीति श्लाघनीय नहीं थी | लक्षणों से पहले से ही यह सूचित हो रहा था कि इस महायुद्ध में सारा कुरुवंश मारा जायेगा | भीष्म पितामह से लेकर अभिमन्यु तथा अन्य पौत्रों तक विश्र्व के अनेक देशों के राजाओं समेत उपस्थित सारे के सारे लोग...

Vinayaka Chaturthi

wolk: Vinayaka Chaturthi विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण तिथि है। यह हर महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं। इसे संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष में) और विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष में) के रूप में जाना जाता है। पूजा विधि:-  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 2. घर के पूजा स्थान को साफ करें और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। 3. गणेश जी को जल, फूल, दुर्वा, फल, और मोदक अर्पित करें। 4. गणेश चालीसा और गणपति स्तोत्र का पाठ करें। 5. अंत में आरती कर प्रसाद बांटें। व्रत का महत्व:-  विनायक चतुर्थी के व्रत को करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसे बुद्धि, ज्ञान, और विघ्नहर्ता के रूप में गणेश जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। ----- विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। साल 2025 की पहली विनायक चतुर्थी 3 जनवरी, शुक्रवार को है। तिथि और सम...

Bhagavad Gita 1.15

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.15 पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः । पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ॥ १.१५ ॥ Translation भगवान् कृष्ण ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया, अर्जुन ने देवदत्त शंख तथा अतिभोजी एवं अतिमानवीय कार्य करने वाले भीम ने पौण्ड्र नामक शंख बजाया | Purport इस श्लोक में भगवान् कृष्ण को हृषीकेश कहा गया है क्योंकि वे ही समस्त इन्द्रियों के स्वामी हैं | सारे जीव उनके भिन्नांश हैं अतः जीवों कि इन्द्रियाँ भी उनकी इन्द्रियों के अंश हैं | चूँकि निर्विशेषवादी जीवों कि इन्द्रियों का कारण बताने में असमर्थ हैं इसीलिए वे जीवों को इन्द्रियरहित या निर्विशेष कहने के लिए उत्सुक रहते हैं | भगवान् समस्त जीवों के हृदयों में स्थित होकर उनकी इन्द्रियों का निर्देशन करते हैं | किन्तु वे इस तरह निर्देशन करते हैं कि जीव उनकी शरण ग्रहण कर ले और विशुद्ध भक्त की इन्द्रियों का तो वे प्रत्यक्ष निर्देशन करते हैं | यहाँ कुरुक्षेत्र कि युद्धभूमि में भगवान् कृष्ण अर्जुन की दिव्य इन्द्रियों का निर्देशन करते हैं इसीलिए उनको हृषीकेश कहा गया है | भगवान् के विविध कार्यों के अनुसार उन...

Fasts and festivals of January 2025

Fasts and festivals of January 2025 जनवरी 2025 के व्रत और त्योहार दिनांक व्रत त्योहार 3 जनवरी 2025 शुक्रवार- विनायक चतुर्थी 6 जनवरी 2025 सोमवार- गुरु गोबिंद सिंह जयंती 7 जनवरी 2025 मंगलवार- मासिक दुर्गाष्टमी 10 जनवरी 2025 शुक्रवार- वैकुंड एकादशी 11 जनवरी 2025 शनिवार- शनि त्रयोदशी, प्रदोष व्रत 12 जनवरी 2025 रविवार- स्वामी विवेकानंद जयंती 13 जनवरी 2025 सोमवार- पौष पूर्णिमा व्रत, लोहड़ी, 14 जनवरी 2025 मंगलवार- मकर संक्रांति, पोंगल, उत्तरायण 17 जनवरी 2025 शुक्रवार- सकट चौथ 21 जनवरी 2025 मंगलवार- कालाष्टमी 22 जनवरी 2025 बुधवार- रामलला प्रतिष्ठा दिवस 25 जनवरी 2025 शनिवार- षटतिला एकादशी 27 जनवरी 2025 सोमवार- प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि 29 जनवरी 2025 बुधवार- मौनी अमावस्या 30 जनवरी 2025 बृहस्पतिवार- माघ नवरात्रि ------------------------------------------------------

Bhagavad Gita 1.14

श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता यथारूप 1.14 ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ । माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥ १.१४ ॥ Translation दूसरी ओर से श्र्वेत घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले विशाल रथ पर आसीन कृष्ण तथा अर्जुन ने अपने-अपने दिव्य शंख बजाये | Purport भीष्मदेव द्वारा बजाये गये शंख कि तुलना में कृष्ण तथा अर्जुन के शंखों को दिव्य कहा गया है | दिव्य शंखों के नाद से यह सूचित हो रहा था कि दूसरे पक्ष की विजय की कोई आशा न थी क्योंकि कृष्ण पाण्डवों के पक्ष में थे | जयस्तु पाण्डुपुत्राणां येषां पक्षे जनार्दनः – जय सदा पाण्डु के पुत्र-जैसों कि होती है क्योंकि भगवान् कृष्ण उनके साथ हैं | और जहाँ जहाँ भगवान् विद्यमान हैं, वहीँ वहीँ लक्ष्मी भी रहती हैं क्योंकि वे अपने पति के बिना नहीं रह सकतीं | अतः जैसा कि विष्णु या भगवान् कृष्ण के शंख द्वारा उत्पन्न दिव्य ध्वनि से सूचित हो रहा था, विजय तथा श्री दोनों ही अर्जुन की प्रतीक्षा कर रही थीं | इसके अतिरिक्त, जिस रथ में दोनों मित्र आसीन थे वह अर्जुन को अग्नि देवता द्वारा प्रदत्त था और इससे सूचित हो रहा था कि तीनों लोकों में ज...