Mokshada Ekadashi

मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi):-   
   एक विशेष एकादशी व्रत है, जो मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इसे मोक्ष प्राप्ति की एकादशी माना जाता है, और इसे विशेष रूप से उन पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए मनाया जाता है जो पितृलोक में हैं।

महत्व

मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यह दिन न केवल आत्मा की मुक्ति का प्रतीक है, बल्कि धर्म, सत्य, और कर्तव्य की ओर प्रेरित करता है।

व्रत विधि

1. स्नान और संकल्प: प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।


2. भगवान विष्णु की पूजा: विष्णु जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं, तुलसी पत्ता चढ़ाएं, और विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें।


3. निराहार या फलाहार: पूरे दिन निराहार या फलाहार रहें। रात्रि जागरण करके भगवान विष्णु का ध्यान करें।


4. दान-पुण्य: जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करें।



पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंधर्व नगरी के राजा वैखानस को एक स्वप्न में यह पता चला कि उनके पूर्वज नरक में कष्ट भोग रहे हैं। उन्होंने ऋषि पर्णद को यह बात बताई। ऋषि ने उन्हें मोक्षदा एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने का सुझाव दिया। राजा ने व्रत किया और अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाया।

2024 में मोक्षदा एकादशी की तिथि

तारीख: 11 दिसंबर 2024, रविवार

पारण का समय: अगले दिन प्रातः ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद व्रत तोड़ें।


मोक्षदा एकादशी का संदेश:- 

मोक्षदा एकादशी हमें सिखाती है कि धर्म और कर्म के मार्ग पर चलकर मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। यह व्रत आत्मा की शुद्धि और पितरों की शांति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

"गीता का सार - धर्म का पालन और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास"

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