सुप्रभातम

सुप्रभातम 


“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।

क्षुरासन्नधारा निशिता दुरत्यद्दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥”



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