11 अग॰ 2024

सुप्रभातम

सुप्रभातम 


“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।

क्षुरासन्नधारा निशिता दुरत्यद्दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥”



कोई टिप्पणी नहीं: