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अक्टूबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
   आप सभी को दीपावली की शुभकामनाये !

2024 में दीपावली कब है?

     इस साल दीपावली के दिन-तारीख को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन है|  कोई 31 अक्टूबर तो 1 नवंबर को दिवाली का पर्व बता रहा है | आइए आपको दीपावली की सही तारीख बताते हैं, इस वर्ष दीपावली का पर्व   31 अक्टूबर 2024   को मनाया जाएगा |

आज का हिन्दू पंचांग

🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞   ⛅️दिनांक - 28 अक्टूबर 2024 ⛅️दिन - सोमवार ⛅️विक्रम संवत् - 2081 ⛅️अयन - दक्षिणायन ⛅️ऋतु - हेमन्त ⛅️मास - कार्तिक ⛅️पक्ष - कृष्ण   ⛅️तिथि - एकादशी प्रातः 07:50 तक तत्पश्चात द्वादशी   ⛅️नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी दोपहर 03:24 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी   ⛅️योग - ब्रह्म प्रातः 06:48 तक तत्पश्चात इन्द्र   ⛅️राहु काल - प्रातः 08:08 से प्रातः 09:33 तक   ⛅️सूर्योदय - 06:42 ⛅️सूर्यास्त - 06:06   ⛅️दिशा शूल - पूर्व दिशा में   ⛅️ब्राह्ममुहूर्त -  प्रातः 05:01 से 05:52 तक   ⛅️अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:01 से दोपहर 12:46 तक   ⛅️निशिता मुहूर्त-  रात्रि 11:58 अक्टूबर 28 से रात्रि 12:49 अक्टूबर 29 तक   ⛅️ व्रत पर्व विवरण - गोवत्स द्वादशी, रमा एकादशी, ब्रह्मलीन मातुश्री श्री माँ महँगीबा जी का महानिर्वाण दिवस   ⛅️विशेष - एकादशी को सिम्बी (सेम) तथा द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)  

speaking scene

    our Real History books carved in stone..   Bhishm Pitamah on his deathbed(arrow bed)The Chennakeshava Temple, Belur, is a 12th-century Hindu temple, Hassan district of Karnataka state  

51 शक्ति पीठ

  यह 51 शक्ति पीठ हिंदू धर्म में देवी शक्ति (दिव्य स्त्री शक्ति) को समर्पित पवित्र स्थान हैं।  ऐसा माना जाता है कि ये स्थान वह हैं जहाँ देवी सती के शरीर के अंग या आभूषण भगवान शिव के तांडव के दौरान गिरे थे।  प्रत्येक शक्ति पीठ देवी के शरीर के एक विशिष्ट भाग और देवी ऊर्जा के एक विशिष्ट पहलू से जुड़ा हुआ है।  भारत और कुछ अन्य देशों में स्थित 51 शक्ति पीठों की सूची निम्नलिखित है:- 1. कामाख्या देवी – असम (योनि) 2. शंकरी देवी – श्रीलंका (कंधे) 3. सुगंधा देवी – बांग्लादेश (नाक) 4. मिथिला देवी – बिहार (बायाँ कंधा) 5. कल्याणी देवी – महाराष्ट्र (चेहरा) 6. महिषमर्दिनी देवी – झारखंड (दायाँ कंधा) 7. विशालाक्षी देवी – वाराणसी, उत्तर प्रदेश (कर्णफूल) 8. ज्वालामुखी देवी – हिमाचल प्रदेश (जीभ) 9. दक्षायणी देवी – तमिलनाडु (गाल) 10. नैनातिवु देवी – श्रीलंका (पाँव) 11. कांचीपुरम देवी – तमिलनाडु (कंकाल) 12. कीरित देवी – पश्चिम बंगाल (मुकुट) 13. विंध्यवासिनी देवी – उत्तर प्रदेश (कलाई) 14. मंगल चंडी देवी – बांग्लादेश (दायाँ हाथ) 15. अट्टहास देवी – पश्चिम बंगाल (होठ) 16. जयन्ती देवी – पश्चिम...

हिन्दू शब्द का उल्लेख

 " ऋग्वेद " के  " ब्रहस्पति अग्यम " में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार आया हैं :- हिमलयं समारभ्य यावत इन्दुसरोवरं । तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते। अर्थात :- हिमालय से इंदु सरोवर तक, देव निर्मित देश को हिंदुस्तान कहते हैं |

तमिलनाडु में विनायक मूर्तियों की शैली में समय के साथ क्या बदलाव आए हैं?

    तमिलनाडु में विनायक मूर्तियों की शैली में समय के साथ कई बदलाव आए हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक, धार्मिक और कलात्मक परंपराओं के विकास को दर्शाते हैं।   कुछ प्रमुख परिवर्तनों में शामिल हैं: प्रारंभिक काल (5वीं-8वीं शताब्दी): इस अवधि के दौरान, विनायक मूर्तियाँ अधिक सरल और शास्त्रीय थीं। वे आमतौर पर पत्थर से बनी होती थीं और गणेश को एक युवा पुरुष के रूप में दर्शाती थीं। चोल काल (9वीं-13वीं शताब्दी): चोल काल के दौरान, विनायक मूर्तियों की शैली में नाटकीय परिवर्तन हुए। मूर्तियाँ अधिक जटिल और सजावटी हो गईं, अक्सर धातु से बनी होती थीं और गणेश को एक अधिक भव्य और प्रभावशाली रूप में दर्शाती थीं। विजयनगर साम्राज्य (14वीं-17वीं शताब्दी): विजयनगर साम्राज्य के दौरान, विनायक मूर्तियों की शैली में दक्षिण भारतीय शैली का प्रभाव देखा गया। मूर्तियाँ अक्सर अधिक विस्तृत और रंगीन थीं, और गणेश को एक अधिक आध्यात्मिक और गंभीर रूप में दर्शाती थीं। आधुनिक काल: आधुनिक काल में, विनायक मूर्तियों की शैली में और भी अधिक विविधता देखी जा सकती है। कुछ मूर्तियाँ पारंपरिक शैली का पालन करती हैं, जबकि अन्य...

तमिलनाडु में कोई ऐसा मंदिर है जहां विनायक को मानव रूप में पूजा जाता हो?

    जी हां, तमिलनाडु में एक ऐसा मंदिर है जहां विनायक को मानव रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर है आदि विनायक मंदिर जो तिरुवरूर में स्थित है। इस मंदिर में विराजमान विनायक की मूर्ति में हाथी का सिर नहीं बल्कि मानव का चेहरा है। यह मूर्ति अपनी अनूठी शैली के कारण बहुत प्रसिद्ध है और देश भर से भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।   आदि विनायक मंदिर की कुछ खास बातें: मानवमुख गणेश: इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां विराजमान गणेश की मूर्ति में मानव का चेहरा है। यह मूर्ति हिंदू धर्म में गणेश के विभिन्न रूपों को दर्शाने वाली एक दुर्लभ मूर्ति है। प्राचीन इतिहास: इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है और इसे कई शताब्दियों पुराना माना जाता है। धार्मिक महत्व: स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर बहुत ही पवित्र है और वे यहां आकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं। वास्तुशिल्प: मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली की है और यह काफी सुंदर और भव्य है।   यदि आप तमिलनाडु घूमने जा रहे हैं तो आदि विनायक मंदिर जरूर जाएँ। यह एक ऐसा मंदिर है जो आपको आध्यात्मिक शांति और अनुभव प्रदान करेगा...

तमिलनाडु में सबसे बड़ी विनायक मूर्ति कहाँ स्थित है?

  तमिलनाडु में सबसे बड़ी विनायक मूर्ति को लेकर कुछ भ्रांतियां हैं। अक्सर यह माना जाता है कि सबसे बड़ी मूर्ति महाराष्ट्र में है, लेकिन ऐसा नहीं है।   तमिलनाडु में एशिया की सबसे बड़ी विनायक मूर्ति अरुल्मिगु मुन्थी विनायगर मंदिर, कोयंबटूर में स्थित है। यह विशाल मूर्ति ग्रेनाइट से बनी है और इसका आकार इतना बड़ा है कि यह दूर से ही दिखाई देती है।   अरुल्मिगु मुन्थी विनायगर मंदिर कोयंबटूर में स्थित है और यह तमिलनाडु के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहां विराजमान विनायक की मूर्ति न केवल अपनी विशालता बल्कि अपनी भव्यता के लिए भी जानी जाती है। यह मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।   अन्य उल्लेखनीय विनायक मंदिर   करपाका विनायकर मंदिर: मदुरै के पास स्थित यह मंदिर भी अपनी विशाल विनायक मूर्ति के लिए जाना जाता है। आदि विनायक मंदिर, तिरुवरूर: यह मंदिर अपने अनोखे मानवमुख गणेश की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।  

तमिलनाडु में सबसे पुरानी विनायक मूर्ति कौन सी है?

  तमिलनाडु में सबसे पुरानी विनायक मूर्ति के बारे में निश्चित रूप से कहना चुनौतीपूर्ण है। कई कारणों से: पुरातात्विक खोजें: नए पुरातात्विक खोजें लगातार होती रहती हैं, जिससे सबसे पुरानी मूर्ति का निर्धारण बदल सकता है। तारीखीकरण की चुनौतियाँ: प्राचीन मूर्तियों की सही उम्र का निर्धारण करना हमेशा आसान नहीं होता है। वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसमें कुछ अनिश्चितता होती है। क्षतिग्रस्त मूर्तियाँ: समय के साथ कई मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं या खंडित हो जाती हैं, जिससे उनकी उम्र का निर्धारण और अधिक मुश्किल हो जाता है।   हालांकि, कुछ मूर्तियाँ ऐसी हैं जिनका उल्लेख अक्सर सबसे पुरानी के रूप में किया जाता है: 5वीं शताब्दी की विनायकी मूर्ति: चेन्नई के पास खोजी गई यह मूर्ति, गणेश के स्त्री रूप का सबसे पुराना प्रतिनिधित्व माना जाता है। हालांकि, यह संभव है कि इससे भी पुरानी मूर्तियाँ खोजी जा सकें।   अन्य महत्वपूर्ण पहलू तमिलनाडु में विनायक मूर्तियों की विविधता: तमिलनाडु में विनायक की मूर्तियाँ विभिन्न शैलियों, आकारों और सामग्रियों में मिलती हैं। कुछ मूर्तियाँ बह...

विनायक की मूर्तियाँ

  विनायक की मूर्तियाँ तमिलनाडु में तमिलनाडु, दक्षिण भारत का एक राज्य, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कई प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। इसके परिणामस्वरूप, यह सदियों पुराने विनायक (गणेश) की मूर्तियों का एक विशाल संग्रह है। ये मूर्तियाँ, अक्सर पत्थर या धातु से जटिल रूप से उकेरी जाती हैं, विभिन्न मुद्राओं और शैलियों में हाथी-सिर वाले देवता को चित्रित करती हैं।   तमिलनाडु में पाए जाने वाले कुछ सबसे उल्लेखनीय विनायक मूर्तियों में शामिल हैं: 5वीं शताब्दी की विनायकी मूर्ति: चेन्नई के पास खोजी गई, यह दुर्लभ मूर्ति गणेश के स्त्री रूप का सबसे पुराना प्रतिनिधित्व माना जाता है। 32 फुट ऊंची गणेश प्रतिमा: गणेश चतुर्थी समारोह के लिए डिंडीगुल में स्थापित, यह विशाल प्रतिमा स्थानीय लोगों के भक्ति का प्रमाण है। अरुल्मिगु मुन्थी विनायगर मंदिर में विनायगर प्रतिमा: कोयंबटूर में स्थित यह विशाल ग्रेनाइट प्रतिमा, एशिया में सबसे बड़ी विनायगर प्रतिमा मानी जाती है। अधि विनायगर मंदिर में मानव-चेहरा वाला गणेश: कुथनुर में पाया गया यह अद्वितीय मूर्ति, गणेश को मानव चेहरे के साथ चित्रित करता है, जो द...

जनेऊ

    जनेऊ का एक नाम यज्ञोपवित भी है , यज्ञोपवीत को समझने के लिए पहले यज्ञ को समझना होगा , हम इसको गीता से समझने की कोशिश करते है :-  गीता के तीसरे अध्याय के ९ वे श्लोक में आया की यज्ञार्थ कर्म   श्री कृष्ण ने कहा की यज्ञ के निम्मित किए जाने वाले कर्मो के अतिरिक्त अन्य सभी कर्म बंधन युक्त है .. इसका अर्थ है की यज्ञ सिर्फ हवन करने को नही कहते क्योंकि वो तो सिर्फ संध्या में किया जाता है यज्ञ कोई ऐसी वस्तु है जिसे २४ घंटे किया जाए तभी बंधन मुक्त होगा अन्यथा बंधन मैं रहेगा । चतुर्थ अध्याय मैं यज्ञ के स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया जिसमे कहा जिसके संपूर्ण शास्त्र सम्मत् कर्म बिना कमाना और संकल्प के होते है तथा जिसके कर्म ज्ञान रूप अग्नि के द्वारा भस्म हो गए हो वो पंडित होता है ,४/१९  जो पुरुष समस्त कर्मो और उनके फलों मैं आसक्ति का त्याग करके संसार के आश्रय से रहित हो गया है सिर्फ परमात्मा मैं नित्य तृप्त है वह कर्मो मैं भली भांति बरतता हुआ भी वास्तव मैं कुछ नहीं करता । ४/२०    जिसका अंत:करण और इन्द्रियों के सहित शरीर जीता हुआ है ओर जिसने समस्त भोग सामग्र...

करवा चौथ

  करवा चौथ : पतिव्रता धर्म का प्रतीक कर्ण चौथ हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक विशेष त्योहार है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निराहार व्रत रखती हैं। यह त्योहार पति-पत्नी के बीच प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।   कर्ण चौथ की कहानियां कर्ण चौथ के बारे में कई लोककथाएं प्रचलित हैं। इनमें से कुछ कहानियों में देवी पार्वती और भगवान शिव का उल्लेख किया जाता है, जबकि अन्य में अन्य देवी-देवताओं का भी उल्लेख मिलता है। एक प्रसिद्ध कहानी में एक साहूकार की बेटी की बात आती है, जिसने अपने पति की जान बचाने के लिए कठोर तपस्या की थी।   कर्ण चौथ के अनुष्ठान सरगी: सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती है। यह एक विशेष थाली होती है जिसमें फल, मेवे, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ होते हैं। व्रत: विवाहित महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। पूजा: शाम को महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और भगवान शिव और पार्वती की पूजा करती हैं। मेहंदी: महिलाएं अपने हाथों पर मेहंदी लगाती हैं। कथा सुनना: महिलाएं कर्ण चौथ की कथा स...

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और धरती के सबसे निकट होता है। इसीलिए इस रात चंद्रमा की चमक अत्यंत मनमोहक होती है।   शरद पूर्णिमा का महत्व देवी लक्ष्मी की पूजा: इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को धन और समृद्धि का वरदान देती हैं। अमृत की वर्षा: मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत की वर्षा करती हैं। इसीलिए लोग खुले में खीर रखते हैं, ताकि चंद्रमा की किरणें उस पर पड़े और खीर अमृत तुल्य हो जाए। रास लीला: कुछ क्षेत्रों में इस दिन भगवान कृष्ण और राधा की रास लीला का आयोजन किया जाता है। स्वास्थ्य लाभ: शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में स्नान करने से स्वास्थ्य लाभ होता है।   शरद पूर्णिमा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य शरद पूर्णिमा को कोजागिरी पूर्णिमा या कौमुदी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा को देखने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा को दे...

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी जी ने देव विग्रहों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की

श्री गोरक्षनाथो विजयतेतराम! विजयादशमी के पावन अवसर पर श्री गोरखनाथ मंदिर परिसर में विद्यमान देव विग्रहों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर लोक-मंगल हेतु कामना की।

साल 2024 में अमावस्या कब-कब है ? यहां जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

  साल 2024 में अमावस्या कब-कब है ? यहां जानें तिथि और शुभ मुहूर्त यहां 2024 में आने वाली सभी अमावस्या तिथियों की सूची है: 1. पौष अमावस्या - 11 जनवरी 2024   2. माघ अमावस्या - 9 फरवरी 2024   3. फाल्गुन अमावस्या - 10 मार्च 2024   4. चैत्र अमावस्या - 8 अप्रैल 2024   5. वैशाख अमावस्या - 8 मई 2024   6. ज्येष्ठ अमावस्या - 6 जून 2024   7. आषाढ़ अमावस्या - 5 जुलाई 2024   8. श्रावण अमावस्या - 4 अगस्त 2024   9. भाद्रपद अमावस्या - 2 सितंबर 2024   10. आश्विन अमावस्या - 2 अक्टूबर 2024   11. कार्तिक अमावस्या - 1 नवंबर 2024   12. मार्गशीर्ष अमावस्या - 1 दिसंबर 2024   13. पौष अमावस्या - 30 दिसंबर 2024   प्रत्येक अमावस्या का तिथि, समय, और महत्व अलग-अलग हो सकता है और यह पूजा व पितृ तर्पण के लिए शुभ माना जाता है। यह सूची आपको आगामी अमावस्या तिथियों के बारे में एक संक्षिप्त जानकारी देती है, ताकि आप अपनी पूजा और व्रत का आयोजन कर सकें। अधिक जानकारी के लिए आप पंचांग या धार्मिक वेबसाइटों पर भी देख सकते हैं।

मां सिद्धिदात्री

  नवरात्रि का नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री की पूजा   नवरात्रि के नौवें दिन देवी दुर्गा के नौवें रूप, मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री को सिद्धियों की देवी माना जाता है। आइए जानते हैं मां सिद्धिदात्री के बारे में विस्तार से:-   मां सिद्धिदात्री का स्वरूप सिद्धिदात्री शब्द का अर्थ है सिद्धियों को देने वाली। वे कमंडल, धनुष, बाण और गदा धारण करती हैं। इनका वाहन सिंह है। इनका रंग पीला होता है। वे शक्तिशाली और साहसी हैं।   मां सिद्धिदात्री का महत्व मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। वे शक्ति और साहस की देवी हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सफलता मिलती है।   पूजा विधि कलश स्थापना: सबसे पहले कलश स्थापित किया जाता है। अष्टगंध: मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर अष्टगंध चढ़ाया जाता है। पुष्प: पीले या लाल फूल चढ़ाए जाते हैं। दीपक: पांच देसी घी के दीपक जलाए जाते हैं। धूप: अगरबत्ती या धूप जलाया जाता है। नैवेद्य: फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। मंत्र जाप: मां सिद्धिदात्री का मंत्र जाप किया ज...

मां महागौरी

  नवरात्रि का आठवां दिन: मां महागौरी की पूजा     नवरात्रि के आठवें दिन देवी दुर्गा के आठवें रूप, मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी को शांति और सुख की देवी माना जाता है। आइए जानते हैं मां महागौरी के बारे में विस्तार से:-   मां महागौरी का स्वरूप महागौरी शब्द का अर्थ है महान गौरी। वे श्वेत वर्ण की हैं और उनके शरीर पर चंद्रमा का प्रकाश होता है। वे त्रिशूल, धनुष, बाण और कमंडल धारण करती हैं। इनका वाहन बैल है। वे शांति और सुख की देवी हैं।   मां महागौरी का महत्व मां महागौरी की पूजा करने से शांति और सुख प्राप्त होता है। वे शक्ति और साहस की देवी हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सफलता मिलती है।   पूजा विधि कलश स्थापना: सबसे पहले कलश स्थापित किया जाता है। अष्टगंध: मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर अष्टगंध चढ़ाया जाता है। पुष्प: श्वेत फूल चढ़ाए जाते हैं। दीपक: पांच देसी घी के दीपक जलाए जाते हैं। धूप: अगरबत्ती या धूप जलाया जाता है। नैवेद्य: फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। मंत्र जाप: मां महागौरी का मंत्र जाप किया जाता है। ...

मां कालरात्रि

नवरात्रि का सातवां दिन: मां कालरात्रि की पूजा     नवरात्रि के सातवें दिन देवी दुर्गा के सातवें रूप, मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि को अज्ञान और तामस का नाश करने वाली माना जाता है। आइए जानते हैं मां कालरात्रि के बारे में विस्तार से:-   मां कालरात्रि का स्वरूप कालरात्रि शब्द का अर्थ है काली रात। वे काले रंग की हैं और उनके शरीर पर अग्नि की लपटें निकलती हैं। उनके दांत और नाखून बहुत बड़े हैं। वे खड्ग और मुंडमाल धारण करती हैं। इनका वाहन गधा है। वे क्रोधित और शक्तिशाली हैं।   मां कालरात्रि का महत्व मां कालरात्रि की पूजा करने से अज्ञान और तामस का नाश होता है। वे शक्ति और साहस की देवी हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सफलता मिलती है।   पूजा विधि कलश स्थापना: सबसे पहले कलश स्थापित किया जाता है। अष्टगंध: मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर अष्टगंध चढ़ाया जाता है। पुष्प: लाल फूल चढ़ाए जाते हैं। दीपक: पांच देसी घी के दीपक जलाए जाते हैं। धूप: अगरबत्ती या धूप जलाया जाता है। नैवेद्य: फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। मंत्र जाप: ...

मां कात्यायनी

  नवरात्रि का छठा दिन: मां कात्यायनी की पूजा     नवरात्रि के छठे दिन देवी दुर्गा के छठे रूप, मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी को क्रोध और शक्ति की देवी माना जाता है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी के बारे में विस्तार से:-   मां कात्यायनी का स्वरूप कात्यायनी शब्द का अर्थ है कात्यायन ऋषि की पुत्री। वे सिंह पर सवार होती हैं। उनके चार भुज होते हैं। वे तलवार, धनुष, बाण और कमल धारण करती हैं। उनका रंग सुनहरा होता है। वे क्रोधित और शक्तिशाली हैं।   मां कात्यायनी का महत्व मां कात्यायनी की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है। वे शक्ति और साहस की देवी हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सफलता मिलती है।   पूजा विधि कलश स्थापना: सबसे पहले कलश स्थापित किया जाता है। अष्टगंध: मां कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर अष्टगंध चढ़ाया जाता है। पुष्प: लाल फूल चढ़ाए जाते हैं। दीपक: पांच देसी घी के दीपक जलाए जाते हैं। धूप: अगरबत्ती या धूप जलाया जाता है। नैवेद्य: फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। मंत्र जाप: मां कात्यायनी का मंत्र जाप किया जात...

मां स्कंदमाता

  नवरात्रि का पांचवां दिन: मां स्कंदमाता की पूजा   नवरात्रि के पांचवें दिन देवी दुर्गा के पांचवें रूप, मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता को बालक स्कंद की माता माना जाता है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता के बारे में विस्तार से:-   मां स्कंदमाता का स्वरूप स्कंदमाता शब्द का अर्थ है बालक स्कंद की माता। वे बालक स्कंद को गोद में लिए हुए हैं। वे सिंह पर सवार हैं। इनका रंग पीला होता है। वे शक्तिशाली और साहसी हैं।   मां स्कंदमाता का महत्व मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान प्राप्ति होती है। वे शक्ति और साहस की देवी हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सफलता मिलती है।   पूजा विधि कलश स्थापना: सबसे पहले कलश स्थापित किया जाता है। अष्टगंध: मां स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर अष्टगंध चढ़ाया जाता है। पुष्प: पीले या लाल फूल चढ़ाए जाते हैं। दीपक: पांच देसी घी के दीपक जलाए जाते हैं। धूप: अगरबत्ती या धूप जलाया जाता है। नैवेद्य: फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। मंत्र जाप: मां स्कंदमाता का मंत्र जाप किया जाता है।   मां स्कंदमाता का म...

मां कुष्मांडा

  नवरात्रि का चौथा दिन: मां कुष्मांडा की पूजा   नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के चौथे रूप, मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कुष्मांडा को ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली माना जाता है। आइए जानते हैं मां कुष्मांडा के बारे में विस्तार से:-   मां कुष्मांडा का स्वरूप कुष्मांडा शब्द का अर्थ है कद्दू के आकार की। वे कमंडल, धनुष, बाण और खड्ग धारण करती हैं। इनका वाहन सिंह है। इनका रंग पीला होता है। वे शक्तिशाली और साहसी हैं।   मां कुष्मांडा का महत्व मां कुष्मांडा की पूजा करने से ब्रह्मांड की उत्पत्ति होती है। वे शक्ति और साहस की देवी हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सफलता मिलती है।   पूजा विधि कलश स्थापना: सबसे पहले कलश स्थापित किया जाता है। अष्टगंध: मां कुष्मांडा की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर अष्टगंध चढ़ाया जाता है। पुष्प: पीले या लाल फूल चढ़ाए जाते हैं। दीपक: पांच देसी घी के दीपक जलाए जाते हैं। धूप: अगरबत्ती या धूप जलाया जाता है। नैवेद्य: फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। मंत्र जाप: मां कुष्मांडा का मंत्र जाप किया जाता है।   मां कु...

मां चंद्रघंटा

  नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा   नवरात्रि के तीसरे दिन देवी दुर्गा के तीसरे रूप, मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा को शक्ति और विजय का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा के बारे में विस्तार से:-   मां चंद्रघंटा का स्वरूप चंद्रघंटा शब्द का अर्थ है माथे पर चंद्रमा का तिलक लगाने वाली। वे त्रिशूल, धनुष, बाण और खड्ग धारण करती हैं। इनका वाहन सिंह है। इनका रंग पीला होता है। वे शक्तिशाली और साहसी हैं।   मां चंद्रघंटा का महत्व मां चंद्रघंटा की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है और विजय प्राप्त होती है। वे शक्ति और साहस की देवी हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सफलता मिलती है।   पूजा विधि कलश स्थापना: सबसे पहले कलश स्थापित किया जाता है। अष्टगंध: मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर अष्टगंध चढ़ाया जाता है। पुष्प: पीले या लाल फूल चढ़ाए जाते हैं। दीपक: पांच देसी घी के दीपक जलाए जाते हैं। धूप: अगरबत्ती या धूप जलाया जाता है। नैवेद्य: फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। मंत्र जाप: मां चंद्रघंटा का मंत्र...