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Maha Shivratri Editorial

महाशिवरात्रि: आत्मचिंतन और जागरण का पर्व :-  हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक यात्रा भी है। यह पर्व हमें आत्मनिरीक्षण, साधना और जागरूकता की प्रेरणा देता है। भगवान शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक दर्शन हैं—संहार और सृजन के संतुलन का प्रतीक। आध्यात्मिकता से जुड़ने का अवसर :-  महाशिवरात्रि का महत्व केवल व्रत रखने या रात्रि जागरण करने तक सीमित नहीं है। यह रात आत्मचिंतन की है, जब हम अपनी सीमाओं से परे जाकर ईश्वर की अनंतता का अनुभव कर सकते हैं। भारतीय दर्शन में शिव को "अद्वैत", यानी निराकार चेतना का प्रतीक माना जाता है। उनका ध्यान करना केवल धर्म का पालन करना नहीं, बल्कि स्वयं को पहचानने की प्रक्रिया भी है। इस दिन शिवलिंग की पूजा का अर्थ केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की ऊर्जा और चेतना को नमन करने का एक तरीका है। शिवलिंग उस अनंत ऊर्जा का प्रतीक है, जिससे सृष्टि का निर्माण हुआ और जिसमें वह अंततः विलीन होती है। समाज और संस्कृति पर प्रभाव  :-  भारत में ...

Maha Shivratri

महाशिवरात्रि: महत्व, कथा, पूजा विधि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भूमिका :- महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भगवान शिव के भक्त बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। महाशिवरात्रि का धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है। यह केवल उपवास और पूजन का दिन ही नहीं है, बल्कि आत्मनिरीक्षण, ध्यान और साधना का भी अवसर प्रदान करता है। इस लेख में हम महाशिवरात्रि के महत्व, पौराणिक कथाओं, पूजा विधि, व्रत के लाभ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और इस दिन किए जाने वाले विशेष अनुष्ठानों के बारे में विस्तार से जानेंगे। महाशिवरात्रि का महत्व :-  महाशिवरात्रि को भगवान शिव और शक्ति (पार्वती) के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान शिव का विशेष पूजन किया जाता है और रात्रि जागरण किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन उपवास और शिव पूजन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव को संहार और सृजन दोनों का देवता माना जाता है। महाशिवरात्रि का पर्व हमें यह भी सिखाता...

Vishnu Lakshmi Khajuraho temples

  Vishnu Lakshmi Khajuraho temples

Ganeshji

  बाधाओं को दूर करने वाले गणेशजी को अक्सर पत्नियों के साथ दर्शाया जाता है ऋद्धि समृद्धि, सौभाग्य का प्रतीक है, और यह भौतिक और आध्यात्मिक विकास से जुड़ी है। सिद्धि आध्यात्मिक शक्ति, ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार का प्रतिनिधित्व करती है, जो ब्रह्मांड के परिवर्तनकारी और मुक्तिदायी पहलुओं का प्रतीक है। साथ में, ऋद्धि और सिद्धि गणेशजी की पत्नी के दोहरे पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि दोनों को दर्शाती हैं।

Glorious Vijaya Stamba of Chittor

  Glorious Vijaya Stamba of Chittor

Designing her feet

  पहली नज़र में ऐसा लगता है कि वह कोई काँटा निकाल रही है, लेकिन करीब से देखने पर पता चलता है कि वह अपने पैरों को जटिल तरीके से डिज़ाइन कर रही है, और उसका सहायक एक उत्तल दर्पण पकड़े हुए है। 

Krishna Berenice Egypt 2nd to 4th century ce

  Balarama, Ekanamsa, Vasudeva - Krishna Berenice Egypt 2nd to 4th century ce

शुभ प्रभात

  "शस्त्र नहीं हैं जहाँ, वहाँ शास्त्र सिर धुनते और रोते हैं, ऋषियों को भी सिद्धि तभी मिलती है जब पहरे पर स्वयं धनुर्धर राम खड़े होते हैं।" शुभ प्रभात 

Hanuman ji was an enlightened scholar of the Vedas.

 न अन् ऋग्वेद विनीतस्य न अ यजुर्वेद धारिणः । न अ-साम वेद विदुषः शक्यम् एवम् विभाषितुम् ।।  वाल्मीकि रामायण 4/3/28 राम कहते हैं कि जिस व्यक्ति से मैंने अभी-अभी बात की थी, वह ऋग्वेद में अच्छी तरह से प्रशिक्षित था, उसके पास यजुर्वेद, सामवेद के विद्वतापूर्ण ज्ञान को याद करने की अपार शक्ति है। वैदिक व्याकरण और संबंधित ग्रंथों के विद्वतापूर्ण आदेश के बिना इस प्रकार की प्रभावशाली और हृदयस्पर्शी बात असंभव है। इस प्रकार, श्री राम ने स्वीकार किया कि हनुमान जी वेदों के प्रबुद्ध विद्वान थे।   Rama says that the person with whom I just talked was well trained in the Rigveda, has enormous power to remember Yajurveda, scholarly knowledge of Samaveda. This type of impressive and heart-touching talk is impossible without a scholarly command of Vedic grammar and related texts. Thus, Shri Rama acknowledged that Hanuman Ji was an enlightened scholar of the Vedas.

Who Harmed Religion and Devotion

  श्रीमद्भागवत में स्पष्ट रूप से आया है की जब कलियुग ने गौ और गौवंश पर अत्याचार करना शुरू किया और राजा परीक्षित ने उनसे प्रश्न किया कि किसने धर्म और भक्ति को हानि पहुँचायी है तो धर्म बोल पड़ा  ........ राजन, हमारे उपर होने वाले अत्याचार से हम तो नष्ट हो जाएँगे और जो अत्याचार करेंगे उन्हें पाप भी लगेगा पर उससे अधिक पाप उन्हें लगेगा जो चुपचाप धर्म की हानि होता हुआ देखेंगे या उन गौ वध करने वाले आततायियों से कोई संबंध रखेंगे । अतः वे सभी लोग जो आज चुप बैठे हैं या विधर्मियों से किसी भी प्रकार का व्यापारिक व्यवहारिक मानसिक संबंध रखे हैं वे सब भी उन सब कुकर्म ( जैसे रामनवमी पर पत्थर बाज़ी ) में सम्मिलित हैं ।और यदि आज भी न जगे तो दुर्दिन के लिए तैयार हो जाएँ । कायर बनकर या फिर " मुझे क्या " की मानसिकता वाले  हिंदुनामधारी उन मलेच्छों से भी अधिक पापी हैं। @wayoflifekarma

हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा और साक्ष्य

हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा और साक्ष्य हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा का उल्लेख विभिन्न पुराणों और ग्रंथों में मिलता है। यह परंपरा उनकी असीम भक्ति, बल, और संकटमोचक स्वरूप से जुड़ी हुई है। 1. हनुमान जी और सिंदूर से जुड़ी कथा वाल्मीकि रामायण और अन्य पुराणों में हनुमान जी की भक्ति के अनेक प्रसंग मिलते हैं, लेकिन सिंदूर चढ़ाने की प्रथा से जुड़ी मुख्य कथा इस प्रकार है— एक बार माता सीता ने हनुमान जी को यह बताया कि भगवान श्रीराम उनके सिंदूर लगाने से प्रसन्न होते हैं और उनकी लंबी आयु होती है। यह सुनकर हनुमान जी ने सोचा कि यदि थोड़ा सा सिंदूर लगाने से श्रीराम इतने प्रसन्न होते हैं, तो यदि वे पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लें तो प्रभु और अधिक प्रसन्न होंगे और उनकी आयु अनंत हो जाएगी। इसी विचार से हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग लिया। जब श्रीराम ने हनुमान जी को इस रूप में देखा, तो वे अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करेगा, उसे उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा और उसके सभी कष्ट दूर होंगे। 2. पुराणों और ग्रंथों में साक्ष्य (i) ब्रह्...

Restore the destroyed temples

नष्ट हुए मंदिरों को पुनः स्थापित करें,  कब्ज़ा किए गए मंदिरों को पुनः प्राप्त करें,  इतिहास को फिर से लिखें, नई पीढ़ी को पुनः जागृत करें,  शिक्षा प्रणाली और सर्किट को नया स्वरूप दें,  सनातन धर्म को पुनः संगठित करें।  अखंड भारत वर्ष सूर्य के रूप में फिर से उदय होगा...  

Maghi Purnima Editorial

WOLK :- माघी पूर्णिमा सनातन परंपरा, आध्यात्मिकता और पुण्य का संगम हिंदू धर्म में माघी पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। माघ माह की पूर्णिमा को होने वाला यह पर्व मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और पवित्र स्नान, दान, पूजा-अर्चना और तपस्या के लिए उत्तम माना जाता है। माघ मास को स्वयं भगवान विष्णु का प्रिय माह कहा गया है और इस मास में गंगा, यमुना तथा अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से प्रयागराज में गंगा-यमुना के संगम पर आयोजित माघ मेले और कल्पवासियों के लिए यह तिथि विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। माघी पूर्णिमा का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। यह पर्व लोगों को आत्मशुद्धि, परोपकार, सहिष्णुता और दान-पुण्य का संदेश देता है। इस दिन भारत में अनेक स्थानों पर भव्य मेलों और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।

Maghi Purnima

WOLK: Maghi Purnima माघी पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह की पूर्णिमा को कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण तिथि होती है और विशेष रूप से स्नान, दान और तपस्या के लिए उत्तम मानी जाती है। इस दिन गंगा, यमुना, और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है।

Maha Kumbh 2025

  महाकुंभ 2025: एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन महाकुंभ मेला, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और विशाल आयोजन है, जो धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं से परिपूर्ण होता है। इस मेले का मुख्य आकर्षण स्नान समारोह होता है, जिसमें लाखों तीर्थयात्री त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं और मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं।

Madambakkam Dhenupureeswarar Temple

      Madambakkam Dhenupureeswarar temple   श्री राम जी एक सबसे प्यारे विनम्र हनुमान जी के साथ   

Ayurvedic Dohe for Health

🌿∥ आयुर्वेदिक दोहे सेहत के लिए ∥🌿 1. दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय, होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

Daily Quotes

     अग्नि वेदाश्चत्वारो मीमांसा न्याय विस्तरः। पुराणं धर्मशास्त्रं च विद्या ह्याताश्चर्तुदश ।।  विभूति योग आयुर्वेदा धनुर्वेदो गान्धर्वश्चैव ते त्रयः। अर्थशास्त्रं चतुर्थं तु विद्या ह्यष्टादशैव ताः ।। (विष्णु पुराण-3.6.27.28)

Shri Mahalaxmi Ashtak Stotra with Hindi meaning

  श्री महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित : Shri Mahalaxmi Ashtak Stotra with Hindi meaning एकदा दुर्वाशा ऋषि द्वारा श्रापित देवराज इंद्र ने धन- वैभव हराकर कंगाल बन गया था। माँ महालक्ष्मी उसके लिए तीनों लोक से अदृश्य हो गए थे। उस समय इंद्र ने लक्षमी माता को वापस लाने के लिए यह अष्टक रचना किया था, जिससे लक्ष्मी जी उसके पास लौट आये थे।।

108 Names of Hanuman ji

   हनुमान जी के 108 नाम हनुमान जी की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। उनके 108 पवित्र नाम...

Daily Quotes

    ।। श्रीहरि: ।। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं। योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम।।३।। (गजेन्द्रमोक्ष स्तोत्र से)

#MahaKumbh2025

 #MahaKumbh2025.  #सनातन_गर्व_महाकुम्भ_पर्व On 14 February 2025, till 08 PM, over 2 lakh Kalpavasis and 94.98 lakhs devotees joined the grand #MahaKumbh2025.  The day saw a remarkable more than 96.98 lakhs holy dips performed, reinforcing the spiritual significance of this timeless tradition. #सनातन_गर्व_महाकुम्भ_पर्व  #MahaKumbh2025